आप ही मेरे सबकुछ हैं,हरि! आपके कारण बल पाँऊ
मैं आपकी दासी बनी रहूँ, मैं आपके रूप से चल जाऊं
करुणा और दया की मूर्त हो,प्रेम प्यार की सूरत हो,
मैं आपके रूप में बलिहारी, मैं आपके पथ पर चल पाँऊ
मुझे आपका काज ही करना हैं,मुझे नेक राह पर चलना हैं
मैं आपके दर पर पड़ी रहूँ, मैं आपका गुण और बल गाऊं
'हरि'!आप ही मेरे प्रियतम हो, मैं गीत तो आप ही सरगम हो
जीते मरते मैं आपकी हूँ,''कृष्णा आकषिणी गौरी आपमें मिल जाऊं
कृष्णा आकषिणी गौरीमैं आपकी दासी बनी रहूँ, मैं आपके रूप से चल जाऊं
करुणा और दया की मूर्त हो,प्रेम प्यार की सूरत हो,
मैं आपके रूप में बलिहारी, मैं आपके पथ पर चल पाँऊ
मुझे आपका काज ही करना हैं,मुझे नेक राह पर चलना हैं
मैं आपके दर पर पड़ी रहूँ, मैं आपका गुण और बल गाऊं
'हरि'!आप ही मेरे प्रियतम हो, मैं गीत तो आप ही सरगम हो
जीते मरते मैं आपकी हूँ,''कृष्णा आकषिणी गौरी आपमें मिल जाऊं


No comments:
Post a Comment